इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने और त्वरित न्याय का मार्ग प्रशस्त करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी करके उस पर सरकार, पुलिस व न्यायिक अधिकारियों को अमल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने विवेचना पुलिस पर नियमों का कड़ाई से पालन न करने पर एक्शन लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मेवालाल प्रजापति को जमानत पर रिहा करने से इन्कार करते हुए दिया है।
यूपी डीजीपी, सचिव गृह व निदेशक FSLहुए हाजिर
कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी उत्तर प्रदेश, सचिव गृह व निदेशक एफएसएल यूपी हाजिर हुए। उन्होंने कोर्ट में सुझाव रखे जिसके आधार पर न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश जारी किया है। इसके तहत कोर्ट ने कहा, राज्य सरकार केसों के भारी काम के बोझ को देखते हुए जिला अदालतों को अतिरिक्त स्टाफ और संसाधन देने के मुद्दे पर विचार करे। राज्य सरकार, उत्तर प्रदेश एफएसएल को गृह मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त विभाग बनाने पर विचार करे। साथ ही सरकार एक साल के अंदर प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज में खाली पदों को भरने की कोशिश करेगी, साथ ही इंस्ट्रूमेंट्स भी देगी।
पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग देना सुनिश्चित करें
हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार/पुलिस विभाग, फोरेंसिक सबूत इकट्ठा करने के लिए पुलिस अधिकारियों को ट्रेनिंग देना सुनिश्चित करे। राज्य सरकार पंजाब हरियाणा की तरह सभी जिला अदालतों के जजों को पीएसओ देने की संभावना पर भी विचार करे। डीजीपी सभी जिला पुलिस प्रमुखों को संबंधित जिला जज की अध्यक्षता में होने वाली मासिक मानिटरिंग सेल की बैठक में खुद शामिल होने का निर्देश जारी करने के साथ विवेचना अधिकारियों को निर्देश जारी करें कि खून से सने हथियार और कपड़े पर मिले खून को डीएनए का पता करने को आरोपी और मृतक से पूछताछ किया जाय। साथ ही ब्लड सैंपल एफएसएल को भेजें।
लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है
कोर्ट ने कहा कि डीजीपी जांच में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान आरोपी और गवाहों के वेरिफाइड ईमेल, मैसेजिंग एप्लीकेशन और मोबाइल नंबर रिकार्ड करने के लिए जरूरी निर्देश जारी करके इन सत्यापित ब्योरे को चार्जशीट में उल्लिखित करें। पुलिस जल्द से जल्द स्पीच-टू-टेक्स्ट एआइ माड्यूल का इस्तेमाल करके गवाहों के बयान रिकार्ड करे। पुलिस अधिकारियों को डीजीपी सर्कुलर जारी करके बताएं कि कोर्ट की कार्रवाई में लापरवाही करने पर भी एनएसएस रूल्स, 2024 के रूल 31 (1) के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
कोर्ट ने अर्जी खारिज की
न्यायिक अधिकारियों को बीएनएसएस रूल्स, 2024 के साथ-साथ ई-प्रोसेस रूल्स, 2026 के अनुसार ई-समन, ई-वारंट और दूसरे कोर्ट प्रोसेस भेजने और नियमों के अनुसार ई एफआइआर और ई-चार्जशीट का इस्तेमाल करने का भी निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने फतेहपुर के हुसैनगंज थाना क्षेत्र में हुई हत्या के आरोपी याची के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने के कारण कोर्ट ने जमानत देने से इन्कार करते हुए अर्जी खारिज कर दी।
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